
WHAT IS DIRECT SELLING BUSINESS ??

सेलिंग एक ऐसा बिजनेस है जो भी प्रोडक्ट कंपनी में बनता है वो सीधे कस्टमर तक पहुंचता है उसे ही डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस कहते है
डायरेक्ट सेलिंग एक ऐसा इंडस्ट्रीज है जो कम समय में अनलिमिटेड पैसा बना सकते है।
डायरेक्ट सेलिंग एक ऐसा इंडस्ट्रीज है जो एक इंसान बाहर का कंपनी में सालों तक काम करके जितना incom नहीं कर पाते उतना डायरेक्ट सेलार महीनों में कमा सकतें है ये डायरेक्ट सेलिन इंडस्ट्रीज का पावर है।
एक इंसान 18 से 20 साल पढ़ाई में समय देता है लेकिन उसके पास कोई स्किल नहीं होता है उसका कोई मकसद नहीं होता है आगे क्या करना है , जिंदगी में क्या सही क्या गलत है ये भी पता नहीं होता है, कोई लक्ष्य नहीं होता है।
वही डायरेक्ट सेलिंग एक ऐसा इंडस्ट्रीज है जहां एक इंसान 18 से 20 साल के पढ़ाई में नहीं सिख लेता है वहीं इंसान डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस में आने के बाद 18 से 20 दिन के ट्रेनिंग में सिख लेता है कि जिंदगी में क्या सही है गलत है उसको एक मकसद मिल जाता है कि जिंदगी में क्या करना है क्या नहीं करना है और क्यों करना है उसको एक रीजन मिल जाता है कि क्यों करना है ।
डायरेक्ट सेलिंग एक ऐसा इंडस्ट्रीज है जिसको करने के लिए न उम्र देखा जाता है ,न डिग्री देखा जाता है ,न जाती, धर्म, और और न ही रंग देखा है।
डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस को करने के लिए बस सीखने के ऊपर फोकस होना चाहिए और कहावत है न कि एक इंसान सिख लिया तो हवाई जहाज चला सकता है और बिना सिख साइकिल भी नहीं चला सकता है ।
डायरेक्ट सेलिंग एक ऐसा बिजनेस है जो एक इंसान बाहर के दुनिया में 10 से 15 हज़ार कमाने का सोच रखते है वही इंसान डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस में आने के बाद लाखों करोड़ों रुपयों कमाने का सोच रखता हैं ।
मैं खुद ऐसा इंसान को देखा हु कि जो एक इंसान नशा करने वाला , लड़की बजी करने वाला इस बिजनेस में आने के बाद उसको जिदंगी समझ में आता है तो ये सभी चीज छोड़ कर अभी अच्छा ख़ाशा लेबल में कम करके अच्छा इनकम कर रहे हैं।
INDIAN'S TOP GREAT LEADERS & MOTIVATION SPEAKER IN DIRECT SELLING Industries
SASHISH KUMAR TIWARI
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Indian award-winning motivational speaker, life coach, trainer, author, and YouTuber
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- HISTORY OF DIRECT SELLING Business..
डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का शुरुआत 1940 में अमेरिका जैसे देशों में हुआ। इस बिजनेस का खोज लिमए tingal और विलियम कैसेबेरी ने किया था ।1940 के दशक में अमेरिका में कैलिफोर्निया नामक बीमारी आया था उस समय वहां के लोग उस इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए कई दवाईयां का इस्तेमाल किए जा रहे थे लेकिन बीमारी से छुटकारा नहीं मिल पा रहा था ऐसा ही समय चल रहा था उस समय डायरेक्ट सेलार अपने पारंपरिक तरीके से घर घर जा करके अपने प्रोडक्ट कर बारे में जानकारी देते थे और अपने प्रोडक्ट के में बताते थे।
उस समय काफी सारे लोगों ने उस प्रॉडक्ट को लिया और इस्तेमाल करने लगे और काइलॉफोर्निया बीमारी से ठीक होने लगे इससे लोगों का प्रॉडक्ट के प्रति और डायरेक्ट सेलार के प्रति विश्वास होने लगा और उस समय से ही DIRECT SELLING Industries लोगों के सामने आया ।
पता है आज अमेरिका इतना विकसित देश क्यों है जिस प्रकार भारत देश में कोई व्यक्ति का जन्म होता है तो उसका आधार कार्ड बनता है ठीक उसी प्रकार अमेरिका जैस देशों में कोई व्यक्ति का जन्म होता है तो उसका नाम से एक GREEN ID बनता है और जन्म से लेकर बड़े होने जो भी उसका जरूरत की चीजें इसी GREEN ID से खरीदा जाता है और जब वह इंसान 18 से 20 साल हो जाता है तब तक उसका एकाउंट में कितने लाखों रुपए जमा रहता हैं इसलिए अमेरिका कम जनसंख्या के बावजूद इतना विकसित देश है। ये है डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का पावर।
भारत में डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का शुरूआत कब और कैसे हुआ??
भारत में डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का शुरूआत 1995 में mr चेतन हांडा और उसके साथी ने किया था ये दोनों कुछ काम से अमेरिका गए थे एक दिन दोनों एक रेस्टोरेंट में चाय पीनें गए थे तभी एक 19,20 साल का एक लड़का एक महंगी गाड़ी से आता है mr चेतन हांडा और उसके साथी जिस रेस्टोरेंट में चाय पीने गए थे उसी रेस्टोरेंट में एक वेटर का काम करता था ये सभी बाते जानकर दोनों हैरान हो गए कि एक वेटर के पास ये सभी कैसे ? तभी जाकर उस वेटर से पूछता है इतना अच्छा लाइफ स्टाईल होने के बाद ये वेटर का कम क्यों कर रहे हो तब वेटर बोलता। है कि मैं एक बिज़नेस मैन हु मैं बिज़नेस करता हु जब हमको थोड़ा समय मिलता है तो ये वेटर का काम करता हु तभी दोनों उससे बिजनेस के बारे में पूछते है कि कैसा बिजनेस जो कि इतना कम उम्र में इतने ऊंचाई पर पहुंच गए तभी वेटर बताता है कि मैं एक डॉयरेक्ट सेलिंग बिज़नेस करता हूं मै एक डॉयरेक्ट सेलार हु। तब से लेकर वे दोनों ने इस बिज़नेस को सिखा समझा और इस बिजनेस को भारत में लाने का सोचा और इस बिजनेस को 1995 में अमेरिका से भारत लाए , लेकिन ये बिजनेस शुरू में भारत के लोगों को समझ नहीं आया इस कारण से भारत के लोग इस बिज़नेस को स्वीकार नहीं किया और ये बिजनेस को वापस अमेरिका लिया गया । और इसमें संशोधन किया गया भाषा में बदलाव किया गया इससे बिज़नेस को समझने में आसान हो गया और फिर से भारत में 10 अगस्त 2003 में स्थापना किया गया।

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