भारत में डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का शुरूआत कब और कैसे हुआ??
भारत में डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का शुरूआत 1995 में mr चेतन हांडा और उसके साथी ने किया था ये दोनों कुछ काम से अमेरिका गए थे एक दिन दोनों एक रेस्टोरेंट में चाय पीनें गए थे तभी एक 19,20 साल का एक लड़का एक महंगी गाड़ी से आता है mr चेतन हांडा और उसके साथी जिस रेस्टोरेंट में चाय पीने गए थे उसी रेस्टोरेंट में एक वेटर का काम करता था ये सभी बाते जानकर दोनों हैरान हो गए कि एक वेटर के पास ये सभी कैसे ? तभी जाकर उस वेटर से पूछता है इतना अच्छा लाइफ स्टाईल होने के बाद ये वेटर का कम क्यों कर रहे हो तब वेटर बोलता। है कि मैं एक बिज़नेस मैन हु मैं बिज़नेस करता हु जब हमको थोड़ा समय मिलता है तो ये वेटर का काम करता हु तभी दोनों उससे बिजनेस के बारे में पूछते है कि कैसा बिजनेस जो कि इतना कम उम्र में इतने ऊंचाई पर पहुंच गए तभी वेटर बताता है कि मैं एक डॉयरेक्ट सेलिंग बिज़नेस करता हूं मै एक डॉयरेक्ट सेलार हु। तब से लेकर वे दोनों ने इस बिज़नेस को सिखा समझा और इस बिजनेस को भारत में लाने का सोचा और इस बिजनेस को 1995 में अमेरिका से भारत लाए , लेकिन ये बिजनेस शुरू में भारत के लोगों को समझ नहीं आया इस कारण से भारत के लोग इस बिज़नेस को स्वीकार नहीं किया और ये बिजनेस को वापस अमेरिका लिया गया । और इसमें संशोधन किया गया भाषा में बदलाव किया गया इससे बिज़नेस को समझने में आसान हो गया और फिर से भारत में 10 अगस्त 2003 में स्थापना किया गया।
जिस प्रकार भारत में शुरुआत में ट्रेन आया तो भारत के लोग काला भूत कहते थे और इसमें बैठने से भी डरते थे इसे भी स्वीकार नहीं किए लेकिन आज भारत के लोग ही train का सफर करने केवलिए 1 महीने पहले टिकट करते है
और bata कंपनी का चप्पल जूता आया तो इसको भी शुरुआत में स्वीकार नहीं किया । लेकिन आज के समय में bata केवल name nhi ब्रांड hai ब्रांड
जब गैस स्लेंडर भी शुरुआत में आया इसको भी स्वीकार नहीं कर रहे थे कहते थे कि आग का गोला है लेकिन वही आज आग का गोला हर घर में है
और जब शुरूआत में नौकरों भी आया इसको भी भारत के लोग इसे स्वीकार नहीं किया लेकिन आज के समय में वही नौकरी को पाने के लिए आज इधर उधर भटक रहे है आज वही नौकरी को पाने किए लाखों करोड़ों लोग compatition का तैयारी कर रहे है आज वही नौकरी को पाने के लिए मंदिर मस्जिद जा रहे है कि नौकरी हो जय
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