भारत में डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस का शुरुआती दौर..
जिस प्रकार भारत में शुरुआत में ट्रेन आया तो भारत के लोग काला भूत कहते थे और इसमें बैठने से भी डरते थे इसे भी स्वीकार नहीं किए लेकिन आज भारत के लोग ही train का सफर करने के लिए 1 महीने पहले टिकट करते है
और bata कंपनी का चप्पल जूता आया तो इसको भी शुरुआत में स्वीकार नहीं किया । लेकिन आज के समय में bata केवल name nhi ब्रांड hai ब्रांड
जब गैस स्लेंडर भी शुरुआत में आया इसको भी स्वीकार नहीं कर रहे थे कहते थे कि आग का गोला है लेकिन वही आज आग का गोला हर घर में है
और जब शुरूआत में नौकरों भी आया इसको भी भारत के लोग इसे स्वीकार नहीं किया लेकिन आज के समय में वही नौकरी को पाने के लिए आज इधर उधर भटक रहे है आज वही नौकरी को पाने किए लाखों करोड़ों लोग compatition का तैयारी कर रहे है आज वही नौकरी को पाने के लिए मंदिर मस्जिद जा रहे है कि नौकरी हो जय आज वहीं नौकरी को पाने के लिए लाखों करोड़ों रुपयों घुस डोनेशन देते है
जब शुरुआती दौर में फिल्म इंडस्ट्रीज आया था तो इसको भी भारत के लोग स्वीकार नहीं किया लेकिन आज वही फिल्म इंडस्ट्रीज लाखों करोड़ों लोगों में से कुछ ही लोग सक्सेस होते है।
ठीक उसी प्रकार जब 10 अगस्त 2003 में डायरेक्टर सेलिंग बिज़नेस का शुरूआत भारत में हुआ तो इसे लोग फंसने फसाने वाला bussiness कहते थे , लूटने वाली कंपनी ,सपने दिखाने वाले कंपनी कहते थे ऐसे में इस बिजनेस को लोग अनेकों नाम से जानते हैं जैसे जोड़ने वाला काम,mlm company, network marketing, जैसे नमो से जानते है l
ऐसे में इस बिज़नेस में लोग ज्वाइन होते थे और सेमीनार,और यहां के ट्रेनिंग को लेने के बाद भी विश्वाश नहीं करते थे और लोगों की बात सुन करके छोड़ के जले जाते थे। ऐसे समय चल रहा था कि 2015 में एक IDSA एक संस्था का स्थापना किया जिसमें वैसे कंपनी को GOVERMENT इस संस्था का मेंबर बनाया जिस DIRECT SELLING COMPANY KA PRODUCT अच्छा था और खुद का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट था ऐसे में जितने भी इल्लीगल कंपनी बंद हो गया
इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (IDSA) के नए अध्यक्ष डॉ. रत्नेश लाल हैं, जिन्हें सितंबर 2025 में चुना गया था। वे हर्बालाइफ इंडिया से हैं और उन्होंने विवेक कटोच का स्थान लिया है।

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